रविवार, 17 जुलाई 2011

आदरणीय कहकर भी हो सकता है अपमान

इस बार अधिक कहना नहीं है। बस एक बात कहना चाहता हूँ और वह भी एक वाक्य में। अभी ब्लॉग-लोक का  भ्रमण करते हुए कुछ पढ़ लिया। लेकिन नीचे का वाक्य खुद से बनाया है। बिना साफ-साफ बताए अब सुनिए क्या कहना चाहता हूँ।

 आदरणीय कहकर भी किसी का अपमान किया जा सकता है। 

इस सत्य का ज्ञान किन-किन पाठकों को है?

6 टिप्‍पणियां:

  1. आदरणीय शब्‍द का प्रयोग औपचारिक न हो तो यह लगभग निश्चित होता है कि आगे आदर-सम्‍मान का फैंतरा होने वाला है, जिस तरह 'वास्‍तव में' या 'हकीकत यह है', कह कर बात का कोई बहकाने वाला पक्ष प्रस्‍तुत किया जाता है.

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  2. यदि संबोधित व्यक्ति को महसूस हो कि उसने अपने पूरे जीवन में कोई ऐसा कार्य किया ही नहीं कि जो किसी के हृदय में श्रद्धा या स्नेह या आदर का भाव पनपा सकता है .. तब उसे जरूर 'आदरणीय' संबोधन अखरेगा.
    हाँ, यदि कपटी और धूर्त लोगों को अनजाने में कोई बड़ी आयु के कारण 'आदरणीय' कह बैठे .. तो भी ... उसे 'आदरणीय' संबोधन' अपना अपमान महसूस होगा.
    यदि आपके विचारों को अतार्किक पाकर मैं उसका लगातार विरोध करता आऊँ और तो भी अपने संबोधनों में आपको 'आदरणीय' कहूँ तो जरूर आपको आपत्ति होगी या अपमान महसूस होगा.
    — स्वर का एक विशेष प्रकार से प्रयोग भी 'आदरणीय' शब्द का भाव विपरीत कर देता है.. "... आजकल तो आप कांग्रेसियों के लिये बड़े आदरणीय बन गये हैं!... क्या बात है!!! "
    — शिष्टाचारवश या आचरण की सभ्यतावश भी कई नादान कुपात्र को भी आदरणीय संबोधन दे बैठते हैं.... हाँ तब भी 'आदरणीय' सम्बोधन उपहासात्मक हो जाता है.

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  3. ब्लॉगरों की एक बहुत बड़ी संख्या ब्लॉगिंग को टाइम पास और टाँग खिंचाई ही मानती है. ऐसी स्थिति में यदि कोई ऐसा करता है तो गंभीर प्रकृति के ब्लॉगरों को उससे संवाद नहीं करना चाहिए. परंतु आप उसे शत-प्रतिशत नहीं रोक सकते. आपने यह कहाँ देखा यह जानने की उत्सुकता है.

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  4. जरुर,
    चन्दन जी हमारा भी यही अनुभव है ||
    जो मूर्ख कहकर नहीं किया जा सकता उससे भी अधिक |

    आज ही आचार्य परशुराम जी को पढ़ा |
    लिंक कर रहा हूँ --


    http://manojiofs.blogspot.com/2011/07/75.html

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  5. जिसके लिए 'आदरणीय' शब्द का इस्तेमाल करते हैं, उसे भी स्वयं ही पाता होता है कि वह इसके योग्य है अथवा नहीं.

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  6. @ आपने यह कहाँ देखा यह जानने की उत्सुकता है.

    लम्बी-लम्बी बहसों में चन्दन जी
    उलझते और उलझाते रहे हैं ||
    आप भी तो वहा रहते ही हैं ||

    फिलहाल चिंता की बात नहीं है ||
    आज वे दोनों काफी अच्छे मित्र हैं ||

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