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मंगलवार, 19 जुलाई 2011

ईश्वर तुम्हें धिक्कार है! (एक अधूरी कविता)

निर्मल  हृदय की  प्रार्थना
निष्कपट मन की  भावना
कोई    नहीं   सम्भावना
फिर   भी तुम्हारी साधना
यह  कर  रहा  संसार है!
ईश्वर  तुम्हें  धिक्कार है!

सोमवार, 4 जुलाई 2011

भगवान बहुत दयालु है(लघुकथा)

मूर्तिकार बहुत सुन्दर मूर्तियाँ बनाता था। एक महीने पहले सुबह-सुबह उसके पास दो बच्चे पहुँचे। एक ने गणेश की, दूसरे ने क्राइस्ट की मूर्ति मांगी। मूर्तिकार ने दोनों को दो सुन्दर मूर्तियाँ बेच दी। रास्ते में मूर्ति को लेकर झगड़ा शुरु हो गया। इसी बीच मूर्तियाँ टूट गईं। हाथापाई शुरु हो चुकी थी। झगड़ा बच्चों के माँ-बाप तक पहुँचा। जमकर मार-पीट हुई। मुकद्दमा शुरु हो गया है। वकीलों की चांदी है। हाँ, मूर्तियाँ फिर खरीद ली गई हैं। मूर्तिकार भी फायदे में है। और मूर्तियों में समाए भगवान चुपचाप देख रहे हैं क्योंकि उन्हें ही तो वकील और मूर्तिकार का धंधा चलाना है!

शनिवार, 25 जून 2011

ईश्वर है ?

(आज से लगभग डेढ़ साल पहले एक आलेख लिखा था, वही आपके सामने है। मेरे विचारों में थोड़ा अन्तर भी आया है और समय के साथ आते रहना चाहिए क्योंकि यही चेतन होने का प्रमाण है। जड़ चीजों में परिवर्तन नहीं होता।

      कुछ बातें अगर किसी को दु:ख पहुँचायें तो माफी चाहूंगा।)

दुनिया के प्रायः सभी धर्म ईश्वर को ही इस संसार का रचयिता मानते हैं। ईश्वर को सर्वशक्तिमान, अत्यंत दयालु और न जाने क्या क्या कहा जाता है। कोई भी पूरी तरह से सुखी नहीं है। गरीब के दुखों के बारे में पूछना तो बेकार ही है। अमीरों के दुखों की कहानी भी कम नहीं है। किसी को औलाद नहीं है, का दुख है। कोई बेरोजगार है, इसलिए दुखी है। जिसके पास नौकरी है, औलाद है, दौलत है सब कुछ है, उसे भय है चोरी का, औलाद के बुरे हो जाने का, नौकरी छिन जाने का और न जाने और कितने ही भय से वह आक्रांत है।

शुक्रवार, 24 जून 2011

कहीं यह इलेक्ट्रान ही भगवान तो नहीं है?


जिन लोगों ने थोड़ा सा भी विज्ञान पढ़ा है उन्होंने निश्चय ही परमाणु संरचना पढ़ी होगी। ईश्वर की सत्ता स्वीकार करनेवालों का कहना है कि ईश्वर कण-कण में विद्यमान है। हवा में भी, पानी में भी, जहर में भी, शराब में भी, दूध में भी, माटी में भी, आग में भी, कुर्सी में भी, आदमी में भी, लादेन में भी, जार्ज बुश में भी, मनमोहन सिंह में भी, कांग्रेस में भी, सोनिया गाँधी में भी, भगतसिंह में भी, सैंडर्स में भी, राबर्ट क्लाइव में भी, सिराजुद्दौला में भी, कमीने मीरजाफ़र में भी, आतंकवादी में भी, सेना में भी, भ्रष्टाचार में भी, भ्रष्टाचार के विरोध में लड़ने वाले में भी, चोर में भी कोतवाल में भी यानि हर जगह। क्या अद्भुत विचार है!