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शनिवार, 23 अप्रैल 2011

बहुराष्ट्रीय कंपनियों का मकड़जाल( भाग-2)


युद्ध की राजनीति और हथियारों का व्यवसाय

युद्ध कभी भी राजनीतिक कारणों के लिये नहीं बल्कि आर्थिक कारणों के लिये ही लड़े जाते हैं। प्रथम विश्व युद्ध के बाद यह बात एकदम शीशे की तरह साफ नजर आती है कि इन विशालकाय कम्पनियों के आपसी हित जब टकराते हैं तो उसका परिणाम पूरी मानव जाति को झेलना पड़ता है। अमेरिका ने प्रथम विश्व युद्ध में दखल देने का निर्णय तभी लिया जब उसने देखा कि अमरीकी कम्पनियों के आर्थिक हित चौपट होते जा रहे हैं।

शुक्रवार, 22 अप्रैल 2011

बहुराष्ट्रीय कंपनियों का मकड़जाल( भाग-1)


प्रस्तुतकर्ता : चंदन कुमार मिश्र

इन विदेशी कम्पनियों ने देश में कम्पन पैदा कर दिया है। पूरे देश में लाखों-करोड़ों लोगों के अस्वस्थ बनाने, रोजगार छीन लेने, भारत को कमजोर बनाने, पूरे देश को जकड़ कर जोंक की तरह पकड़ कर रखने में इन बहुराष्ट्रीय कम्पनियों ने कोई प्रयास नहीं छोड़ रखा है। इसी विषय पर आइए एक शानदार किताब पढ़ते हैं जो कुछ कड़ियों में आपके सामने प्रस्तुत की जायेगी जिसका नाम है- बहुराष्ट्रीय कंपनियों का मकड़जाल। इसके लेखक हैं राजीव दीक्षित। इस किताब में आप निम्न अध्यायों को पढ़ेंगे।