महान क्रान्तिकारी अफ़जल साहब ने ऐसा क्या कर दिया कि सरकारें उन्हें हर दिन सरका रही हैं। पहले भाजपा ने और अब कांग्रेस ने, दोनों ने काम तो एक ही किया है सजा को सरकाते रहने का। नोबेल शान्ति पुरस्कार जो अधिकतर अशान्ति फैलाने वालों को दिया जाता है, ओबामा को दिया गया है। वह भी राष्ट्रपति बनने के तुरंत बाद ही। आखिर क्या किया है उसने? मैंने तो सुना है कि जिस समय नोबेल की घोषणा की गई उस समय भी अमेरिका युद्ध के विचारों में या युद्ध में डूबा हुआ था। उसका नेतृत्त्व तो ओबामा ही कर रहा था। लेकिन उसे यह पुरस्कार दिया गया। यह बताता है कि अमेरिका का नोबेल समिति पर कितना दबदबा है। पिछले बीस सालों में अमेरिका ने इतने नोबेल झटके हैं कि उसके पास नोबेल पुरस्कार रखने के लायक जगह भी कठिनाई से बन पाती है।