तीसरा दृश्य
( मंच पर एक चारपाई है। उसपर महात्माजी आराम कर रहे हैं। )
वाचक: चारपाई में बहुत अधिक खटमल थे। इनके सोते ही खटमलों ने धावा बोल दिया। इतना अधिक भोजन किया कि करवट बदलने में भी तकलीफ होती थी। खटमलों ने काटना शुरु किया। महात्माजी त्राहि-त्राहि करने लगे।) बुद्धूदेव: ब्रह्माजी! मैं अभी आपसे 3 वरदान मांगता हूँ। पहला वरदान मुझे यह दीजिए कि अभी फौरन इन खटमलों को मार डालिए। अभी मेरा पेट दुख रहा है। इसलिए मुझे दूसरा वरदान यह दीजिए कि किसी वैद्य के यहाँ से कोई पाचक की गोली मांग लाइए और तीसरा वरदान मैं यही सोचता हूँ कि जब मैं चाहूं तब आपसे 3 वरदान मांग लूं। ( ब्रह्माजी खटमलों को मारना शुरु करते हैं। फिर मंच से चले जाते हैं )