पहले एक व्यक्ति से आपका परिचय कराते हैं। एक परिचित हैं मेरे। नाम नहीं लूंगा। नेपाल के रहनेवाले हैं। मेरे साथ दो-तीन साल तक पढ़ते रहे हैं। उनका एक बार-बार दुहराया जानेवाल कथन था(शायद अब भी हो)- आई हेट हिन्दी। अंग्रेजी को खूब पसन्द करते हैं। वे हमारे देश के वासी नहीं हैं। इसलिए मुझे उनसे हिन्दी को लेकर ज्यादा बहस नहीं करनी होती है।
मैंने उन्हें बताया है कि मैं अंग्रेजी के खिलाफ़ एक किताब लिख रहा हूँ। ये बात वे जानते हैं। यहाँ सबसे बड़ा मुद्दा है देशभक्ति और ग्लोबल सिटिजन होने का।
उनका एक मेल आया है मेरे पास। उसके कुछ अंश पढ़िए।