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शुक्रवार, 11 नवंबर 2011

पैसा, वेतन, बिहार सरकार, आडवाणी की यात्रा …गड्डमड्ड बातें बिहार की ( दूसरा और अन्तिम भाग )

(पैसा, वेतन, नीतीश कुमार, बिहार सरकार, प्रभात खबर, अंग्रेजी, निजी स्कूल, संसद, सांसदों के वेतन, आडवाणी की भ्रष्टाचार विरोधी जनचेतना यात्रासब कुछ गड्डमड्ड हैं इस लेख में। इस लेख में सुसंगठित होना मेरे लिए सम्भव नहीं था। इसके लिए माफ़ी चाहता हूँ।)


पिछले भाग के बाद

निजी स्कूलों का पंजीयन और उनकी ताकत

गुरुवार, 10 नवंबर 2011

पैसा, वेतन, बिहार सरकार, आडवाणी की यात्रा …गड्डमड्ड बातें बिहार की ( पहला भाग )


(पैसा, वेतन, नीतीश कुमार, बिहार सरकार, प्रभात खबर, अंग्रेजी, निजी स्कूल, संसद, सांसदों के वेतन, आडवाणी की भ्रष्टाचार विरोधी जनचेतना यात्रा…सब कुछ गड्डमड्ड हैं इस लेख में। इस लेख में सुसंगठित होना मेरे लिए सम्भव नहीं था। इसके लिए माफ़ी चाहता हूँ।)

प्रभात खबर के तमाशे

बिहार में इन दिनों मीडिया सुशील कुमार के पीछे पगलाया हुआ है। वही सुशील जिन्होंने कौन बनेगा करोड़पति में पाँच करोड़ रूपये जीते हैं। प्रभात खबर ने तो एक दिन के लिए अतिथि सम्पादक ही बना डाला है। बिहार सरकार मनरेगा का ब्रांड एम्बेसडर बनाना चाहती है। ऐसी खबर भी सुनने में आई। वही बिहार सरकार जो छह हजार रूपये की तनख्वाह सुशील को देती है।

बुधवार, 14 सितंबर 2011

भाषा पर नीतीश का दोहरा रवैया

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के दो अलग-अलग व्यवहारों को देखिए आज, हिन्दी दिवस पर। अब बताएँ वे सरकार के पक्षधर लोग कि हिन्दीभाषी राज्य बिहार के सुशासन बाबू का यह रवैया कैसा माना जाय। 

सबसे पहले देखिए इस जगह जहाँ आप पाएंगे वही सदाबहार अपील, जो हर साल करोड़ों पन्नों को बरबाद करने के लिए छापी जाती है।

14 सितम्बर को हिन्दी के लिए अपील करते नीतीश
              
फिर दैनिक जागरण की साइट पर यह खबर देखिए, जो ऐसे शुरू होती है।

सीएम ने लिखा ब्लॉग वादा पूरा किया, लेकिन जारी रहेगी मेरी जंग

पटना, जागरण ब्यूरो : लंबे अर्से के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपने ब्लाग के माध्यम से एक बार फिर राज्यवासियों से मुखातिब हुए हैं। राज्य सरकार के प्रति विश्र्वास कायम रखने के लिए जनता को धन्यवाद देते हुए उन्होंने कहा है कि पिछले नवंबर में बिहार चुनाव के आये नतीजों के बाद पहली बार मैं अपने विचार आप सभी से बांट रहा हूं। विश्र्व के विभिन्न क्षेत्रों से बहुतों ने मुझसे पूछा, मैंने ब्लाग पर लिखना क्यों छोड़ दिया। सच यह है कि मैं आप सभी से जुड़ने के लिए किसी बेहतर मौका के इंतजार में था। अब, वह समय आ गया। पिछले सप्ताह हमारी सरकार ने वह कर दिखाया जिसके बारे में मैं अर्से से बेचैन था। हमने आय से अधिक सम्पत्ति के मामले में लिप्त एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के घर में प्राथमिक विद्यालय खोल दिया। उनका घर पिछले साल बने विशेष न्यायालय कानून के तहत जब्त किया गया है। इस भवन में स्कूल का खुलना कोई साधारण ल्ल शेष पृष्ठ 21 पर
     
यह खबर आज पटना से प्रकाशित अन्य अखबारों में भी प्रकाशित है।
इस खबर के उल्लेख करने का अभिप्राय सिर्फ़ इतना ही है आप यह देख सकें कि मुख्यमंत्री ने अपना ब्लॉग कैसे लिखा है। यहाँ पढ़िए उनका लिखा।

13 सितम्बर को अंग्रेजी में लिखा लेख
     
तो श्रीमान अंग्रेजी में लिखते हैं और अपील हिन्दी के लिए। वह भी कल और आज, अलग-अलग भाषा में। यही नहीं इनके ब्लॉग पर लेखों के हिन्दी-अंग्रेजी अनुवाद एक साथ रहते हैं। कुल बारह लेखों में से सात अंग्रेजी में हैं। साफ समझना है कि ये लेख वे अमेरिका-इंग्लैंड-न्यूजीलैंड-आयरलैंड-कनाडा आदि देशों में पढ़े जाने के ही लिख रहे हैं। यहाँ यह बता दें कि कुछ दिन पहले इन्होंने एक किताब लिखी थी, वह भी अंग्रेजी में।
      इसे नीतीश का कौन-सा व्यवहार कहें? क्या यह नहीं हो सकता था कि आज बिहार राष्ट्रभाषा परिषद् और बिहार हिंदी ग्रंथ अकादमी को बन्द करने का ऐलान कर दिया जाता?

गुरुवार, 1 सितंबर 2011

बिहार पर विशेष : शिक्षा में सारे घटिया प्रयोग कर रही नीतीश सरकार



बढ़ता हुआ बिहार जिन्हें देखना है, उनके लिए आज कुछ खास बातें हैं। जरा इस ओर भी एक नजर देख लीजिए ताकि आपका भ्रम भी टूटे।

बेहतर कहलाने की इच्छा अगर है, तो बेहतर काम भी तो करने चाहिए। लेकिन बिहार में नीतीश सरकार ठीक इसका उलटा कर रही है। बेहतर कहलाने की इच्छा तो बहुत है लेकिन बेहतर काम नहीं। यहाँ बात करते हैं इधर हुए शिक्षा-क्षेत्र में नए-नए खुराफ़ातों की। जैसे शिक्षक पात्रता परीक्षा, साइकिल बँटाई योजना, मैट्रिक में प्रायोगिक परीक्षा समाप्ति योजना, वित्तरहित महाविद्यालयों के लिए की गई दिखावटी योजना और दस हजारी योजना की। आइए जरा इसकी पड़ताल कर लेते हैं।

गुरुवार, 2 जून 2011

सुशासन के बिहार में अपराध का सच


कौन कह रहा है कि बिहार में अपराध में कमी आई है। जी हाँ, जब बिहार सरकार खुद यह नहीं कहती तब औरों के कहने से क्या होता है? बिहार सरकार की पुलिस विभाग की वेबसाइट पर 2001 से लेकर फरवरी 2011 तक के अपराधों और पुलिस के संज्ञान में आने वाली सभी घटनाओं की संख्या दी गई है।


रविवार, 27 फ़रवरी 2011

प्रखंडों में क्लर्की के लिए मारामारी कर रहे हैं बिहारी इंजीनियर


पटना,

बी टेक, बी ई, बी एस सी( इंजीनियरिंग), एम टेक, एम एस सी( इंजीनियरिंग), एम सी ए आदि ये है उच्च डिग्रियाँ जिसे पाने के लिए एक लम्बे समय के साथ काफी पैसे खर्च करने पड़ते हैं। लेकिन इनकी हालत या यूं कहें कि बिहार में इंजीनियरों की हालत का अंदाजा लगाया जा सकता है एक छोटी सी बहाली से जो अभी वर्तमान में बिहार सरकार द्वारा की जा रही है। इस बारे में थोड़ी सी जानकारी मैं यहां पहुंचा रहा हूं। बिहार सरकार ने कुछ दिन पहले कांट्रैक्ट पर एक नियुक्ति की घोषणा की। पद का नाम है ब्लाक आई टी एसिस्टेंट। पूरे बिहार में 534 पद। सैलरी है 8000 रूपये।  फरवरी की 11 तारीख को अंतिम दिन था इसके लिए आनलाइन आवेदन करने का। परिणाम घोषित हो चुके हैं। 3 मार्च 2011 को 11 बजे बुलाया गया है काउंसेलिंग के लिए। मेरे पास सात जिलों के परिणाम हैं जिन्हें मैं आपके सामने रखूंगा। सारण, सीवान, मधुबनी, जहानाबाद, अरवल, नवादा और पटना के परिणाम पर जरा विचार करते हैं।