बुधवार, 20 जुलाई 2011

एक अंग्रेजी लेखक के बाप को सम्मान देने की तैयारी जिसने भगत सिंह के खिलाफ गवाही दी थी

इच्छा तो कुछ और लिखने की थी लेकिन लिख कुछ और रहा हूँ। एक बेहद शर्मनाक खबर है। अपनी इस पोस्ट का शीर्षक मैं वहीं से लेकर इस्तेमाल कर रहा हूँ।

खबर यहाँ है , विस्तार से पढिए। हमारी सरकार ने भगतसिंह जैसों के लिए तो पहले ही अंग्रेजी में टेरोरिस्ट शब्द किताबों में लिखवाया है। उग्रवादी या आतंकवादी तो पहले से भगतसिंह को घोषित किया गया है। आई सी एस ई और सी बी एस ई बोर्ड तो हैं ही देश को नीचे ले जाने के लिए। इन बोर्डों के भक्तजनों को दुख पहुँचना लाजमी है। उनसे माफी नहीं मांगूंगा क्योंकि अपनी किताब में भी इनकी आलोचना की है। एक अच्छा पक्ष दिखाकर बोर्ड को बहुत अच्छा साबित करनेवाले भाई लोग यहाँ बयानबाजी न करें।

अंग्रेजी लेखकों में भारत में कुछ नाम बड़े (कु?)प्रसिद्ध हैं जैसे खुशवन्त सिंह, विक्रम सेठ, अरूंधति राय, चेतन भगत आदि। कुछ अच्छे लोग भी हैं जैसे आर के नारायण और मुल्क राज आनंद। अन्य लोगों का नाम लेने की जरूरत नहीं है(इनसे अधिक दो-चार नाम ही जानता हूँ इसलिए भी) क्योंकि सब अन्तरराष्ट्रीय  बनने के चक्कर में अंग्रेजी के गुलाम बने हुए हैं और  अंग्रेजी भक्तों (जैसे मनमोहन और आडवाणी आदि) के प्रिय भी। इनमें से अभी मेरे विषय के लिए बस एक ही आदमी उपयुक्त हैं, नाम है- खुशवन्त सिंह्। इनके पिता का नाम था शोभा सिंह्। इन बाप-बेटों की बात का सबूत यहाँ हैं।  इस शोभा नाम के आदमी ने एक अत्यंत अशोभनीय काम किया है भगतसिंह के खिलाफ़। आप इस काम को यहाँ स्पष्ट शब्दों में पढ़ सकते हैं। इस आदमी को 'सर' की उपाधि मिली हुई थी। सर यानि अंग्रेजों के भक्तों की एक उपाधि। 'सर' का अर्थ भी है- अंग्रेजों के यहाँ असमानता फैलाने के लिए एक अमानवीय उपाधि। कुछ इसे सम्मान या आदर से दिए जाने वाले संबोधन के रूप इस्तेमाल करते हैं। अफ़सोस कि भारत में हर दिन जितनी बार 'सर' बोला जाता है उतनी बार शायद संसार के सभी देश मिलकर भी नहीं बोलते होंगे। यहाँ कहा जा सकता है कि बाप का अपराध बेटे के सिर पर क्यों? निश्चित रूप से खुशवन्त सिंह का लिखा कुछ-कुछ और कभी-कभार हमें भी अच्छा लगता है जैसे हर बुरा आदमी भी कहीं-कहीं अच्छा हो जाता है और कई बार होता भी है। अब इस शोभा सिंह ने किया क्या है, यह सब विस्तार से ऊपर के लिंक पर जाकर पढ़ लें। उस खबर को लिखने वाले के बारे में यहाँ और यहाँ थोड़ा पढ़ लें। ज्यादा क्या कहूँ? अब इस मुद्दे को भी भाजपा पकड़ कर बैठी तो? क्योंकि भाजपा और कांग्रेस हैं तो एक ही फोटो। बस एक श्वेत-श्याम और दूसरा रंगीन।

1 टिप्पणी:

  1. सरक-सरक के निसरती, निसर निसोत निवात |
    चर्चा-मंच पे आ जमी, पिछली बीती रात ||

    http://charchamanch.blogspot.com/

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