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मंगलवार, 27 सितंबर 2011

भगतसिंह नास्तिक और कम्युनिस्ट थे, थे और थे ( भगतसिंह पर विशेष )


भगतसिंह का लिखा एक लेख है- युवक, बलवन्तसिंह के नाम से। यह मतवाला के 16 मई, 1925 के अंक में छपा था। आलोचना के 32वें वर्ष के अक्टूबर-दिसम्बर, 1983 अंक में, इस बात की पुष्टि आचार्य शिवपूजन सहाय ने की थी। युवक शीर्षक लेख में भगतसिंह अमेरिका के युवक दल के नेता पैट्रिक हेनरी के अमेरिका के युवकों में की गई ज्वलन्त घोषणा “We believe that when a Government becomes a destructive of the natural right of man, it is the man’s duty to destroy that Government.” अर्थात् अमेरिका के युवक विश्वास करते हैं कि जन्मसिद्ध अधिकारों को पद-दलित करने वाली सत्ता का विनाश करना मनुष्य का कर्तव्य है, को उद्धृत करते हैं। अफसोस है कि आज के अमेरिका की स्थिति एकदम 180 डिग्री पर उल्टी है। उस वक्त अमेरिका, इटली, रूस, आयरलैंड, फ्रांस आदि देशों के अनेक लेखकों-चिन्तकों से भगतसिंह प्रेरणाएँ लिया करते थे, क्योंकि इन सब देशों में क्रांतिकारी आन्दोलन हुआ करते थे या ईमानदार नेता भी अधिक थे।