महाभारत की घटना कभी हुई है, इसमें मुझे संदेह है। लेकिन जगह-जगह जीवन के अलग-अलग मौकों पर महाभारत की कहानी से कुछ उपमाएँ हमारे यहाँ दी जाती रही हैं। या फिर मौके-बेमौके पात्रों की तुलना हम लोगों से भी करते रहते हैं जैसे हमारे यहाँ चुप्पी से भीष्म का, कुटिलता से शकुनी मामा का, मोह से धृतराष्ट्र का, ताकत या ज्यादा खाने या विशाल शरीर से भीम का तो सीधा संबंध ही मान कर चला जाता है। इसी क्रम में मैं आज महाभारत और उस युद्ध में शामिल एक प्रमुख पात्र अर्जुन पर कुछ विचार रखना चाहता हूँ। यद्यपि यह मैं मानता हूँ कि यह कहानी वास्तविक नहीं है, फिर भी इस पर अपने ये विचार रख रहा हूँ।