भारत में इस्लाम पर बोलना हमेशा से विवादास्पद रहा है। कोई कहता है कि फलाँ व्यक्ति या नेता तुष्टिकरण की नीति अपना रहा है, तो कोई मुस्लिमों का पक्ष लेने पर हिन्दुओं का विरोधी कह देता है। भारतीय इतिहास का अपना शून्य के बराबर ज्ञान जिसे ज्ञान भी नहीं ही कहना चाहिए, से मैंने फ़ेसबुक पर जगदीश्वर चतुर्वेदी जी के नोट पर कुछ बातें रखीं। कुछ सवाल हैं, जो कई बार सोचने के लिए बाध्य करते हैं या जिनका उत्तर नहीं मिलता या मैं जिनका उत्तर नहीं खोज पाता।
यहाँ चतुर्वेदी जी का नोट है और नीचे मेरे विचार, जो मैंने फ़ेसबुक पर रखे थे।